सोच से बना इन्सान ।
-तुषार भांड
ईमानदारी कही छुप गई है
सागर में वो डूब गई है
ढूंढ़ने से ना मिल रही है
वो अब कहाँ पे खो गई है।
भ्रष्टाचारी की लहर
व्हायरस की तरह फैल रही है
हर इंन्सान को वो घायल कर रही है
इसपे कोई दवा निकल नहीं रही है।
इनसानियत अब कहाँ जल गई है
राख में अब मिल गई है
ढूढ़ने से भी अब ना मिल रही है।
घमंड ...
मन में हर रोज जाग रहा है
फिर इन्सान को वो अब अँधेरे में ला रहा है
वो कब हवा हो रहा है
उसे मालूम नहीं हो रहा है।
ऋषभ दिव्येन्द्र
03-Apr-2023 12:48 PM
बहुत खूब
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Varsha_Upadhyay
03-Apr-2023 10:30 AM
बेहतरीन
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पृथ्वी सिंह बेनीवाल
03-Apr-2023 08:33 AM
शानदार
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